Skip to main content

Bemissal Mart

Bemissal Mart

_______________

Itihas Ke Watayan Se

₹125.00
Add to Wishlist
Add to Wishlist
Compare
Other people want this. 2 people have this in their carts right now.
Category:

Description

हम धर्मनिरपेक्षी इतिहास बरसों से लिख रहें हैं, किन्तु साम्प्रदायिकता बढ़ती जा रही है। आज लोग गलत बातों में सिर खपाते हैं और शिकायत को ‘मुद्दा’ बनाकर अपनी व्यवस्था के ‘जहर’ को बाहर नहीं निकाल फेंकना चाहते, क्योंकि यह ‘जहर’ उनकी राजनीति को कायम रखे हुए है। अगर हिन्दू-मुसलमान मिलकर एक ‘अखंड भारत’ की स्थापना करें, तो दुश्मन खुद कमजोर पड़ जायेंगे, क्योंकि भारत का हर दंगा दुश्मनों के नापाक इरादों को पूरा करता है।

यदि हम एक हजार साल के हिन्दू-मुस्लिम मेल-मिलाप को दरकिनार कर देते हैं, तो उन सैयद इब्राहिम रसखान का क्या होगा, जिन्होंने श्रीकृष्ण के बाल-लीलाओं का गुणगान भगवान मानकर किया है? क्या हम सालबेग को इसलिए बरतरफ कर दें कि वे मुसलमान थे? क्या हम इस तथ्य को नजरअंदाज कर दें कि उड़ीसा के हर गांवों में श्री जगन्नाथ जी का स्वागत आज भी सालबेग के भक्ति गीतों से किया जाता है।

अजमेर के मुस्लिम गायक मीरा बाई और बुल्लेशाह का भजन गाते हैं। गरासिया मुसलमान मातृदेवी की पूजा करते हैं। अलवर और भरतपुर के मेव मुसलमान अपने को श्रीकृष्ण और अर्जुन का वंशज मानते हैं और महाभारत का पाठ सस्वर करते हैं।

डा- मासूम रजा ‘राही’ के कलम से निकला ‘महाभारत’ धारावाहिक भारतीय संस्कृति का बेजोड़ नमूना है। बंगाली मुस्लिम कारीगरों द्वारा देवी दुर्गा का प्रतिमा-निर्माण करना आदि राष्ट्रीय एकता का ज्वलंत उदाहरण है।

इस पुस्तक में अतीत के अनेक अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है जो यथार्थ होते हुए भी अभी तक ओझल था। पुस्तक का मुख्य उद्देश्य सामयिक, सामाजिक समस्याओं के संदर्भ में हकीकत का दोनों पहलू दिखाकर राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करते हुए आपसी भाईचारे का पुनर्निमाण करना है। आज की इस भाग-दौड़ वाली जिंदगी में लोगों के पास उतना समय नहीं होता कि वे मोटे ग्रंथों का समुचित अध्ययन कर सकें। इसमें कम पृष्ठों में अधिक से अधिक तथ्यों को समेटा गया है।

चूंकि ‘इतिहास के वातायन से’ का सृजन इतिहास के गर्भ से हुआ है। अतः तथ्य संबंधी चूक की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि- ‘जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ’। इसमें वर्णित तथ्य अंतिम सत्य नहीं हो सकते। इतिहास जैसे विषय पर नित नये हो रहे अनुषंधानित प्रतिपादनों को देखते हुए इसे अंतिम होने का दावा नहीं किया जा सकता।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Itihas Ke Watayan Se”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Quick Comparison

Itihas Ke Watayan Se removeDarakte Rishte removeSrijan removeBewafa Waqt remove
NameItihas Ke Watayan Se removeDarakte Rishte removeSrijan removeBewafa Waqt remove
ImageItihas Ke Watayan SeDarakte RishteSrijanBewafa Waqt
SKU
Rating
Price₹125.00₹125.00₹99.00₹125.00
Stock
Availability
Add to cart

Add to Cart

Add to Cart

Add to Cart

Add to Cart

Description
Contentहम धर्मनिरपेक्षी इतिहास बरसों से लिख रहें हैं, किन्तु साम्प्रदायिकता बढ़ती जा रही है। आज लोग गलत बातों में सिर खपाते हैं और शिकायत को ‘मुद्दा’ बनाकर अपनी व्यवस्था के ‘जहर’ को बाहर नहीं निकाल फेंकना चाहते, क्योंकि यह ‘जहर’ उनकी राजनीति को कायम रखे हुए है। अगर हिन्दू-मुसलमान मिलकर एक ‘अखंड भारत’ की स्थापना करें, तो दुश्मन खुद कमजोर पड़ जायेंगे, क्योंकि भारत का हर दंगा दुश्मनों के नापाक इरादों को पूरा करता है। यदि हम एक हजार साल के हिन्दू-मुस्लिम मेल-मिलाप को दरकिनार कर देते हैं, तो उन सैयद इब्राहिम रसखान का क्या होगा, जिन्होंने श्रीकृष्ण के बाल-लीलाओं का गुणगान भगवान मानकर किया है? क्या हम सालबेग को इसलिए बरतरफ कर दें कि वे मुसलमान थे? क्या हम इस तथ्य को नजरअंदाज कर दें कि उड़ीसा के हर गांवों में श्री जगन्नाथ जी का स्वागत आज भी सालबेग के भक्ति गीतों से किया जाता है। अजमेर के मुस्लिम गायक मीरा बाई और बुल्लेशाह का भजन गाते हैं। गरासिया मुसलमान मातृदेवी की पूजा करते हैं। अलवर और भरतपुर के मेव मुसलमान अपने को श्रीकृष्ण और अर्जुन का वंशज मानते हैं और महाभारत का पाठ सस्वर करते हैं। डा- मासूम रजा ‘राही’ के कलम से निकला ‘महाभारत’ धारावाहिक भारतीय संस्कृति का बेजोड़ नमूना है। बंगाली मुस्लिम कारीगरों द्वारा देवी दुर्गा का प्रतिमा-निर्माण करना आदि राष्ट्रीय एकता का ज्वलंत उदाहरण है। इस पुस्तक में अतीत के अनेक अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है जो यथार्थ होते हुए भी अभी तक ओझल था। पुस्तक का मुख्य उद्देश्य सामयिक, सामाजिक समस्याओं के संदर्भ में हकीकत का दोनों पहलू दिखाकर राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करते हुए आपसी भाईचारे का पुनर्निमाण करना है। आज की इस भाग-दौड़ वाली जिंदगी में लोगों के पास उतना समय नहीं होता कि वे मोटे ग्रंथों का समुचित अध्ययन कर सकें। इसमें कम पृष्ठों में अधिक से अधिक तथ्यों को समेटा गया है। चूंकि ‘इतिहास के वातायन से’ का सृजन इतिहास के गर्भ से हुआ है। अतः तथ्य संबंधी चूक की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि- ‘जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ’। इसमें वर्णित तथ्य अंतिम सत्य नहीं हो सकते। इतिहास जैसे विषय पर नित नये हो रहे अनुषंधानित प्रतिपादनों को देखते हुए इसे अंतिम होने का दावा नहीं किया जा सकता।ऐसे संवेदनशील वातावरण में जबकि वैवाहिक संबंधों का अस्तित्व संक्रमण काल से गुजर रहा है, ‘घिसटता घरौंदा’ एक सुखद संकेत तथा आस्था की नई दस्तक के साथ सामने पेश करने का प्रयास किया गया है। मानवीय मूल्यों को बचाए रखने के लिए भरसक रचनात्मक पहल करते हुए समकालीन परिप्रेक्ष्य के उन तमाम कमियों और सुधारों पर प्रकाश डाला गया है, जो यथार्थ की सुदृढ़ नींव है। प्रेम-विवाह के बाद संबंधों के बनते-बिगड़ते समीकरण और शादी के बाद उत्पन्न हालात का जायजा शब्दों की आंखों से साफ दिखाई देता है। संबंधों को निभाने के लिए वक्त की पीड़ाओं व बद्हालियों का बहुत सुंदर और सहज समाधान निकालने का प्रयास किया गया है।कविता अन्तर्मन की वह अनुभूति होती है, जो भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कागज पर अपने-आप उतर जाती है। ‘सृजन’ में आम आदमी की पीड़ा को शब्दों में उड़ेलते हुए तथा उनकी समस्याएँ, उनका दर्द महसूस किया गया है।‘बेवफा वक्त’ की मार्मिक संवेदनशीलता बरकरार रखते हुए अनोखी शैली में संस्मरणात्मक रूप दिया गया है। पूरी पुस्तक में औपन्यासिक रोचकता का ध्यान रखा गया है। इसमें विभिन्न मानवीय चित्तवृतियों को मनोवैज्ञानिक ढंग से बहुत ही अच्छी तरह और ईमानदारी से उकेरा गया है। इसकी कहानी आत्म-केन्द्रित होते हुए भी एक विशाल कैनवस पर उतरी जान पड़ती है। पुस्तक समाप्त करने के बाद पाठक तय नहीं कर पाते हैं कि वे उपन्यास पढ़ रहे थे या डायरी, इसे रिपोर्ताज कहा जाये या आत्म कथा, यह समाज विज्ञान की पुस्तक है अथवा ललित निबंध की। एक विद्या में अनेक विधाओं को समेटकर एक नई विधा तराशी गयी है।
WeightN/AN/AN/AN/A
DimensionsN/AN/AN/AN/A
Additional information
Shopping Cart
No products in the cart.
Select the fields to be shown. Others will be hidden. Drag and drop to rearrange the order.
  • Image
  • SKU
  • Rating
  • Price
  • Stock
  • Availability
  • Add to cart
  • Description
  • Content
  • Weight
  • Dimensions
  • Additional information
  • Brand
  • brands
  • Color
Click outside to hide the comparison bar
Compare
Compare ×
Let's Compare! Continue shopping